प्यार पर मेरे अपने अलग विचार हैं।

डियर मन, शीर्षक – प्यार पर मेरे अपने अलग विचार हैं। आमतौर पर जब लोग किसी से मोहब्बत करतें हैं, तो उस मोहब्बत करने के पीछे कई वजह होती हैं। आपको उसकी आंखे पसन्द हो सकती हैं, उसके बोलने का तरीका पसंद हो सकता है, जिदंगी जीने का उसका अंदाज, चीजों को देखने का उसका…

मुझमें जो तू है ना, वो बिल्कुल मेरे जैसा है..

कभी नटखट बालक की हँसी जैसा है, तो कभी हर वक्त कल्पनाओं में रहने वाले कवि जैसा है। कभी समन्दर की लहरों सा बेबाक है तू.. तो कभी शान्त बहती नदी जैसा है। मुझमें जो तू है ना, वो बिल्कुल मेरे जैसा है.. कभी मौसमों में सावन है तू,   तो कभी उदास पतझड़ों जैसा…

नब्ज जाँच लेना उसकी जलाने से पहले, कलाकार अच्छा था, कहीं किरदार में न हो।

नब्ज जाँच लेना उसकी जलाने से पहले, कलाकार अच्छा था, कहीं किरदार में न हो। कल से सुशांत सिहं राजपूत की मौत की खबर से सकते में हूँ, और यकीन मानिए उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने से पहले तक मुझे यह भी लगता रहा कि मौत की वजह कुछ और भी हो सकती है। इतना…

“ ईश्क में सबुकछ बेवजह होता है ”…

मुझे ईश्क नहीं करना चाहिए था.. कभी भी नहीं !! क्योंकि मैनें सुना था, बहुत उलझनें देता है ये और बहुत बेसब्रियाँ भी। और खासकर तब, जब आपको ऐसे शख्स से मोहबब्त हो जाये, जिसे आप पा नहीं सकते… चाह कर भी। एक चेहरा जिसे देखकर आपको लगता है, कि आप इसे बहुत जानते हो…

पर्सनल भड़ास –

दी गयी तस्वीरें और खबर सोचनीय व निन्दनीय है। क्या कोई इंसान इस हद तक गिर सकता है। दुनिया में कोई भी धर्म ऐसा करने की इजाजत नहीं देता और न ही कभी देगा। जो डाक्टर्स, पुलिस, सीमा पर हमारे जवान, मीडियाकर्मी व अन्य लोग अपने परिवारों से दूर आकर, आज आपकी सेवा में निरन्तर…

मैं बिखरी हूई हूँ…तुम मुझे समेट लोगे क्या.. ?

मैं भीड़ में कहीं खो गयीं हूँ तुम मुझे ढूँढ लोगे क्या.. ? जब दूर तलक कोई न हो, जहां मंजिलों का भी पता न हो, ऐसे गुमनाम रास्तों पर साथ चल दोगे क्या.. ? कभी बेवजह भी मैं रोयी हूँ, कभी आधी नींद भी मैं सोयी हूँ, बस यूँ मानों की मैं बिखरी हूई…

अजनबी सा हमसफर…

कितनी अजीब सी होती है ना ये, जिन्दगी.. इतनी अजीब कि इन अन्जान रास्तों पर चलते-चलते आपको कब कोई अजनबी ना हमसफर मिल जायेगा, आपको पता भी नहीं चलता। हमारी सारी शुरुआती मुलाकातें बहुत अन्जान सी थी, या यूँ कहे कि हम एक-दूसरे को केवल नाम से जानते थे। मोहब्बत की शुरुआत का अगर नजरों…

तुम पहले हो कि जिसने ये चिंगारी लगायी है…

तुम्हारी मुलाकात से पहले मेरी कविताओं का कोई आधार न था बेहिसाब अल्फाजों के बीच इन किस्सों का कोई सार न था। हाँ ये सच है कि तुम्हारे बगैर गुजरें हैं कई मौसम बेवजह, और ये भी कि तुमसे पहले वो बेपरवाह इश्क किसी से हुआ भी न था। अब कलम हाथ में पकड़कर, जो…

वक़्त तुमसे हिसाब मांगेगा..

आज जब सब लोग अपनी एक अलग दुनिया में हैं, सब एक अंधी दौड़ में शामिल हैं, उन्हें ये भी नहीं पता कि वो कौन सा स्थान पायेंगे, वो शायद ये भी नहीं जानते कि प्रथम आयेंगे या अन्तिम या फिर बस हार जायेंगे। बस ऑख बन्द किये उठतें हैं रोज सुबह और उनकी यही…